एक रात एक ख्वाब ने किया परेशां इस कदर |
रात भर घुमते रहे इधर उधर ||
कैसे बताएं उस रात की रवानी को |
कैसे भूल जाएँ उस ख़ूबसूरत कहानी को ||
उस ख्वाब में कोई मेरा अपना था |
लेकिन वो एक बीता हुआ सपना था ||
काश बन जाता वो हकीकत |
तो बदल जाती मेरी भी किस्समत ||
वो रात तो आँखों आँखों में कट गई |
लेकिन ये जिन्दगी टुकड़ों में बंट गई ||
उस ख्वाब से परेशां थी रातें मेरी |
वो हकीकत हो जाती तो संवरती जिन्दगी मेरी ||
उस ख्वाब में एक हसरत थी मेरी |
ऐ नौकरी जरुरत है तेरी||
उस ख्वाब में बन गया था कर्मचारी |
लेकिन अभी जिन्दगी में है बेरोजगारी ||
Monday, November 30, 2009
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